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तेल à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ है। इसके बगैर à¤à¥‹à¤œà¤¨ की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ à¤à¥€ नहीं की जा सकती। लेकिन इन दिनों जब à¤à¥€ सेहत की बात आती है तो तेल की चरà¥à¤šà¤¾ जरूर उठती है। यह सवाल à¤à¥€ अकà¥à¤¸à¤° उठता है कि हमें कौन-सा तेल खाना चाहिà¤? यानी कौन-सा तेल अचà¥à¤›à¤¾ है और कौन-सा खराब? कितना खाना चाहिà¤?
सबसे पहले तो बात करते हैं कि कौन-सा तेल अचà¥à¤›à¤¾ है और कौन-सा खराब? इसका सबसे आसान जवाब है- कोई à¤à¥€ तेल अचà¥à¤›à¤¾ या बà¥à¤°à¤¾ नहीं है। दरअसल, कोई à¤à¥€ तेल अपने आपमें पूरा नहीं है। इसलिठहमें केवल à¤à¤• ही तेल लगातार नहीं खाना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤› अरसा पहले नेशनल इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¤¯à¥‚ट ऑफ नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤¶à¤¨ हैदराबाद ने अपनी à¤à¤• रिसरà¥à¤š में à¤à¥€ इस बात की अनà¥à¤¶à¤‚सा की थी कि हमें हर तीन माह में अपना तेल बदल देना चाहिà¤à¥¤
मैं तो कहूंगी कि हमें तीन माह में ही नहीं, बलà¥à¤•ि लगातार तेल बदलते रहना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤• बोतल तेल खतà¥à¤® होते ही हमें दूसरी तरह का तेल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना चाहिà¤à¥¤ बलà¥à¤•ि इससे à¤à¥€ बेहतर तो यह होगा कि हमें अपने किचन में कम से कम दो तरह के तेल à¤à¤• साथ रखने चाहिà¤à¥¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बदल-बदलकर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने चाहिà¤à¥¤ मसलन, सबà¥à¤œà¥€ सरसों के तेल में बनाà¤à¤‚ तो दाल सनफà¥à¤²à¤¾à¤µà¤° के तेल में (या जो à¤à¥€ पसंद हो)।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ बार-बार बदलें तेल?
हर कà¥à¤•िंग ऑयल अपने आप में विशिषà¥à¤Ÿ होता है। तेल में तीन तरह के फैट पाठजाते हैं - पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैट (PUFA), मोनोअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैट (MUFA) और सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैट। किसी तेल में कोई जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहता है तो किसी तेल में कोई कम। तीनों ही फैट की à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ हमारे शरीर के लिठजरूरी है। न à¤à¤• सीमा से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾, न ही बहà¥à¤¤ कम। इसीलिठतेलों को बदल-बदलकर खाना à¤à¤• बेहतर तरीका होता है। इससे तीनों फैट हमारे शरीर को मिलते रहते हैं और उनकी अधिकता à¤à¥€ नहीं होती। इसके अलावा किचन में कम से कम दो तरह के तेल इसलिठà¤à¥€ रखने चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हर तेल डीप फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ के लिठअचà¥à¤›à¤¾ नहीं होता। उदाहरण के लिठऑलिव आयल। यह हर तरह से अचà¥à¤›à¤¾ है, लेकिन तलने के लिठनहीं। तो डीप फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ के लिठमूंगफली, सनफà¥à¤²à¤¾à¤µà¤° या सोयाबीन का तेल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। बघार के लिठसरसों या ऑलिव ऑयल का यूज किया जा सकता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ घी का à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना बेहतर रहेगा।
कितना तेल खाà¤à¤‚?
फलां तेल दिल के लिठअचà¥à¤›à¤¾ है, फलां नहीं, सब वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ की बातें हैं। तेल तो कोई सा à¤à¥€ हो, जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में खाने पर सेहत के लिठहानिकारक ही होता है। à¤à¤• वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को रोजाना अधिकतम तीन चमà¥à¤®à¤š तेल ही खाना चाहिà¤à¥¤ तीन चमà¥à¤®à¤š का मतलब है करीब 20 मिली तेल। यानी महीने में लगà¤à¤— आधा लीटर तेल। अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ अगर छोटे-बड़े मिलाकर चार सदसà¥à¤¯ हैं तो दो या ढाई लीटर से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तेल की खपत नहीं होनी चाहिà¤à¥¤ छौंक, अचार, डीप फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ सब मिलाकर।
घर की डीप फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ चीजें अचà¥à¤›à¥€ होती हैं?
डीप फà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ चीजें खाने के शौकीन अकà¥à¤¸à¤° यह तरà¥à¤• देते हैं कि वे घर पर खाते हैं, बाहर नहीं। इसलिठमहीने में à¤à¤•-दो बार तला हà¥à¤† खा सकते हैं। अगर आप 40 पार हो गठहैं तो डीप फà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ चीजें खाना तो बंद ही कर दीजिà¤, चाहे घर की हों या बाहर की। बाहर की चीजें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नà¥à¤•सान करती हैं, लेकिन घर पर खाà¤à¤‚गे तो à¤à¥€ सेहत के लिठनà¥à¤•सानदायक ही होगा। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि डीप फà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ चीजें खाने का सीधा-सा मतलब होगा अपने रोज के तीन चमà¥à¤®à¤š तेल के कोटे या महीने के आधा लीटर के कोटे को पार करना। तो à¤à¤¸à¥‡ में दिल हमेशा खतरे में रहेगा।
कैसे बचें बार-बार इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से?
à¤à¤• बार तलने के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किठगठतेल को दोबारा बिलà¥à¤•à¥à¤² इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤ रेसà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤‚ और ढाबे आदि में à¤à¤• ही तेल को बार-बार इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है, इसीलिठजो लोग बाहर खाना खाते हैं, उनको दिल की बीमारी होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। घर पर अगर आप इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से बचना चाहते हैं तो तलने के लिठछोटी और गहरी कड़ाही का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना चाहिà¤à¥¤ इससे तेल कम बचेगा।
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